📖 अध्याय 2105 – प्राचीन छाया
🎧 “The Warrior Against the God” कहानी आप D. Code FM पर सुन रहे हैं…
अथर्व देव दीरिप्ति का चेहरा नहीं देख पा रहा था,
लेकिन उसकी उलझन उसे साफ़ महसूस हो रही थी।
“कुछ नहीं,” उसने तुरंत बात संभाली,
“मैं बस यूँ ही बकवास कर रहा था।”
फिर अचानक बोला,
“वैसे देखा जाए तो तुम सच में काफ़ी बदकिस्मत हो।
इतने लोगों में से… तुम मेरे साथ गिर पड़ीं।
तुम—जो जीवन की सृजन देवी हो,
सबसे पवित्र, सबसे जीवन-प्रिय अस्तित्व—
अब मेरे साथ रसातल में पाप कर रही हो।” 😐
“अगर कभी तुम्हें अपनी सारी यादें लौट आईं,
तो मुझे पूरा यक़ीन है
कि तुम मुझे अपनी ही सृजन शक्ति से
राख बना देने में एक पल भी नहीं लगाओगी।” 🔥
दीरिप्ति का हाथ पल भर को रुक गया।
फिर वह धीमे से बोली—
“मुझे कुछ पुराने चेहरे धुंधले-धुंधले याद आते हैं…
लेकिन मैं खुद कौन हूँ,
यह मुझे याद नहीं।”
“और अब…”
उसकी आवाज़ और भी नरम हो गई,
“मेरी सोच, मेरी भावनाएँ,
मेरी पूरी दुनिया…
सब कुछ तुमसे जुड़ा है।”
“मैं बहुत लंबे समय तक अकेली रही हूँ।
अकेलापन मुझे डराता है।
तुम्हारी मौजूदगी ने
उस अनंत अकेलेपन को तोड़ दिया।”
फिर उसने अथर्व देव की ओर देखा,
“लेकिन तुम…
इस दुनिया में आने के बाद से
तुम्हारी आत्मा का खालीपन
हर दिन बढ़ता जा रहा है—”
“बस, बस!”
अथर्व देव ने जल्दी से उसे रोक दिया। 😤
“इतना काफी है।
मैं धुंध सम्राट हूँ, समझी?
पूरा रसातल मुझे देखकर कांपता है।”
“मैं बस थोड़ा-सा नुकसान महसूस कर रहा हूँ…
और तुम उसे ऐसे गिनवा रही हो
जैसे नोटिस ही न कर सकती हो?”
दीरिप्ति चुप हो गई।
उसके चारों ओर की रोशनी
गर्म और कोमल बनी रही। 🌤️
कुछ सोचने के बाद
उसने सिर हिलाया।
“मैं… बेहतर बनना सीखूँगी।”
अथर्व देव थोड़ा चौंका,
फिर हल्की-सी मुस्कान उसके चेहरे पर आ गई। 😊
“लगता है…
समय की शुरुआत से लेकर आज तक
इतनी आज्ञाकारी सृजन देवी
किसी ने नहीं देखी होगी।”
दीरिप्ति: “…”
अचानक अथर्व देव की आँखें सिकुड़ गईं।
वह सीधा बैठ गया।
“हमारा ‘शिकार’…
आख़िरकार सामने आ गया है।” 🐺
🌑 उत्तरी दिव्य क्षेत्र – यमान दायरा
अनंत अंधकार का अस्थि सागर
यह जगह हमेशा की तरह
घोर अंधेरे में डूबी थी।
भले ही अनंत अंधकार का शैतानी क्रिस्टल हट चुका था,
फिर भी यहाँ की अंधेरी आभा
पूरे आदिम अराजकता में सबसे भारी थी। 😈
दानव महारानी नंदा
कई घंटों से यहाँ खड़ी थी।
उसके साथ कोई चुड़ैल नहीं थी।
उसकी नज़रें
एक टूटे-से काले स्तंभ पर टिकी थीं,
जिसे वह हाल के दिनों में
एक पल के लिए भी अनदेखा नहीं कर पाई थी।
श्रेड—!
अचानक उसके चारों ओर लगी बाधा फट गई।
एक पीला, साफ़ टखना सामने आया।
नंदा ने ऊपर देखा और बोली,
“तुम अपना पद छोड़कर
यहाँ क्यों आई हो,
ब्रह्मा God दायरा की राजा?”
वंशिका कुछ कहने ही वाली थी कि
नंदा ने उसे रोक दिया।
“कोशिश मत करना।
मुझे उससे कोई खबर नहीं मिली।
तुम जानती हो—
उसके लिए घर संदेश भेजना नामुमकिन है।”
“लेकिन…”
वंशिका ने हार नहीं मानी।
“तुमने कहा था
कि तुमने उसे
अपनी निर्वाण दानव सम्राट आत्मा का हिस्सा दिया था।
वह तो दानव सम्राट की आत्मा है…
शायद—”
“नहीं,”
नंदा ने ठंडे स्वर में कहा। ❄️
वंशिका की उम्मीद टूट गई।
उसने चिढ़कर स्तंभ की ओर देखा।
“तो तुम यहाँ
सिर्फ इस टूटे स्तंभ को घूरने आई हो?
इतनी कोशिशों के बाद भी
अगर इसमें कुछ होता,
तो अब तक सामने आ चुका होता।”
नंदा ने सिर हिलाया।
“मेरी निर्वाण आत्मा
इससे जुड़ नहीं पा रही,
लेकिन मुझे साफ़ महसूस होता है—
यह कुछ छिपा रहा है।”
“मैंने हर तरीका आज़मा लिया।
सब बेकार।”
वंशिका ने हाथ बाँध लिए।
“तो फिर… इसे तोड़ दो।
अगर कुछ निकला—अच्छा।
न निकला—तो चिंता खत्म।”
नंदा के होंठों पर
हल्की-सी मुस्कान आई। 😏
“मुझे पता था
तुम कोई काम की सलाह नहीं दोगी।”
“यह वस्तु निर्वाण शैतान कबीले की नहीं है—
यह उस पर खुदे नाम से साफ़ है।”
उसने स्तंभ पर उँगली फेरी।
‘शीतल’
“जो बात मुझे चैन नहीं लेने देती,
वह यह है कि
यह वस्तु
निर्वाण दानव सम्राट आत्मा की जगह
इतनी प्राचीन हालत में छोड़ी गई थी।”
अचानक उसने वंशिका की ओर देखा। 👀
“वंशिका…
मुझे अपना खून दो।” 🩸
(👉 अगला हिस्सा चाहें तो भेजिए।
मैं इसे भी सरल सड़क हिंदी + इमोजी में
उसी स्टाइल में आगे बढ़ाऊँगा 📖🔥)
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