📖 अध्याय 2103 – मतभेद बोना 🌫️⚔️
“The Warrior Against the God”
🎧 कहानी आप D. Code FM पर सुन रहे हैं…
दीरिप्ति ने धीमी आवाज़ में कहा,
🗣️ “लेकिन आपने आज जो किया है… उसके बाद एक उच्च पुजारी तो निश्चित ही स्वयं प्रकट होगा।”
अथर्व देव के होंठों पर रहस्यमयी मुस्कान उभरी 😏
“सिर्फ एक उच्च पुजारी?”
वह हल्के से हँसा।
“मुझे तो हैरानी नहीं होगी अगर रसातलीय सम्राट खुद सामने आ जाएँ। आखिर… जो असंभव उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था, वही अब अफवाहों के रूप में फैल रहा है।”
दीरिप्ति ने संकोच से पूछा 🤔
“तो… आपका उद्देश्य पवित्र भूमि में मतभेद फैलाना है?”
अथर्व देव का चेहरा कमजोरी से सफ़ेद था,
लेकिन उसकी आवाज़ बर्फ़-सी ठंडी ❄️
“नहीं… मैं मतभेद बो रहा हूँ—पूरे रसातल में।”
उसने आकाश की ओर देखा 🌌
और दानव महारानी नंदा की दी हुई चेतावनी को बुदबुदाया—
🩸 “किसी दायरे को नष्ट करने के लिए, पहले उसके भीतर मतभेद बोने होते हैं।
और मतभेद बोने के लिए… उनके विश्वास को तोड़ना पड़ता है।”
रसातलीय सम्राट—
इस दुनिया का सर्वोच्च विश्वास था।
“आज के बाद,” अथर्व देव ने मन ही मन सोचा,
“धुंध सम्राट की उपस्थिति कम हो जाएगी।
मुझे अनन्त धुंध में अपनी साधना अत्यंत सावधानी से करनी होगी।”
और फिर…
👁️ “अब देखते हैं… आगे दुनिया क्या रंग दिखाती है।”
🌱 रसातली बीज
“रसातली बीज” केवल योद्धाओं की आत्मा में नहीं बोया गया था—
यह गहन अभ्यासियों के हाथों
हर जीवित प्राणी के हृदय में फैल रहा था ❤️🔥
यह बीज कैसा विकृत फूल बनेगा…
यहाँ तक कि अथर्व देव भी नहीं जानता था।
लेकिन उसकी उम्मीदें… बहुत ऊँची थीं 🌑
🩸 टूटता विश्वास
नानासिंग दर्द से कराहते हुए जागा 😣
तेज़ पीड़ा ने उसे याद दिलाया—
यह कोई सपना नहीं था।
“तुम आखिर जाग ही गए,”
बाई सुवीर की घायल आकृति उसकी नज़र में आई।
नानासिंग चुप था…
उसकी आँखों में विश्वास की राख थी ⚰️
धुंध सम्राट ने
उसके शरीर से नहीं—
उसके विश्वास से खून बहाया था।
🌫️ उजड़ा हुआ दायरा
चारों ओर बंजर भूमि थी।
महिलाएँ, बच्चे, गहन अभ्यासी—
सबकी आँखें खाली थीं 😶
“यह… जगह?” नानासिंग ने पूछा।
बाई सुवीर ने भारी स्वर में कहा—
🗺️ “गहन मरु दायरा… अब अनन्त धुंध में समा चुका है।”
वे शब्द…
उसकी आत्मा को चीर गए 💔
🔥 आरोप और विद्रोह
शशांक आगे बढ़ा—
उसकी आवाज़ काँप रही थी,
लेकिन उसमें धर्मी क्रोध भरा था ⚡
“तुम्हीं ने यह सब करवाया!”
“तुम रसातल-योद्धाओं ने!”
बाई सुवीर का गुस्सा भड़क उठा 😠
पवित्र भूमि का दबाव नीचे उतरा।
लेकिन तभी…
👀 अनगिनत आँखें उसे घूर रही थीं—
डर, घृणा, पीड़ा और नफ़रत से भरी।
सम्मान…
श्रद्धा…
सब गायब हो चुके थे।
उसकी तलवार रुक गई ❄️⚔️
🕊️ मौन प्रायश्चित
नानासिंग ने धीमे से कहा—
“चलो… यहाँ से चलते हैं।”
जाते-जाते
बाई सुवीर ने जेड का एक टुकड़ा फेंका 💎
“यह मेरा नाइट टोकन है।
पूर्वोत्तर की ओर जाओ—
श्वेत चाक-लोक।
जहाँ तक कितने जीवित रहोगे…
वह किस्मत तय करेगी।”
और वह चला गया—
एक पल भी पीछे मुड़कर नहीं देखा 🚶♂️
🌌 सत्य का बीज
अथर्व देव अपने साधना स्थान लौटा।
कुछ समय बाद…
एक रहस्यमय दृश्य-पत्थर सक्रिय हुआ 🔮
उसमें दिखा—
धुंध सम्राट।
रसातल-योद्धाओं का विनाश।
और गहन मरु दायरा…
अनन्त धुंध में विलीन होता हुआ 🌫️
अथर्व देव स्तब्ध रह गया।
“अगर यह सच है…”
उसने आँखें बंद कीं,
“तो रसातल की पूरी कहानी…
सबसे बड़ा झूठ है।”
⚖️ आने वाला तूफ़ान
मेघजीत ने गंभीर स्वर में कहा—
“यह मामला अब पवित्र भूमि का है।”
अथर्व देव मुस्कुराया 😌
“और मतभेद… अपना काम कर चुके हैं।”
उसने आकाश की ओर देखा 🌠
“ताराचन्द्र जुड़वाँ…”
“लगता है… अब मेरी बारी है।”
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